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रिमझिम सावन मेला के समापन में सीएम की धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय एवं रजनी बघेल हुई शामिल, झूले का लिया आनंद,सफलता के लिए महापौर अलका बाघमार सहित निगम की सराहना

दुर्ग । नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा आयोजित रिमझिम सावन मेला 2025 का भव्य समापन समारोह रविवार को केवल भवन, स्टेशन रोड स्थित परिसर में बड़ी धूमधाम और सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी और वरिष्ठ समाजसेविका कौशल्या देवी साय उपस्थित रहीं, वहीं महापौर अलका बाघमार, रजनी बघेल, गौरी सुरेंद्र कौशिक नगर निगम की कार्यक्रम के प्रभारी हर्षिका संभव जैन मंचासीन रहे।

सांस्कृतिक गौरव का जीवंत उत्सव

समापन समारोह में हजारों की संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। मंच पर एक के बाद एक मनमोहक प्रस्तुतियों ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लोकनृत्य, भजन, समूह गायन, स्किट और नारीशक्ति पर आधारित प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही।

नगर निगम की पर्यटन संस्कृति विभाग व महिला बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सावन मेला का आज रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन हुआ जिसमे बतौर मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री के धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय जी उपस्थित रही इस दौरान उन्होंने संभागायुक्त की धर्मपत्नी महापौर अलका बाघमार के साथ सावन झूला का आनंद लिया.

इससे पूर्व निगम की एमआईसी सदस्यो व पार्षदों ने कौशल्या देवी साय की गरिमामय ढंग से स्वागत किया साथ ही लोकसभा सांसद की धर्मपत्नी रजनी बघेल ने शामिल होकर महापौर अलका बाघमार,आयुक्त सुमित अग्रवाल,गौरी सुरेंद्र कौशिक, प्रभारी हर्षिका संभव जैन, शशि साहू, पूर्व विधायक की धर्म पत्नी मंजू वोरा, पूर्व महापौर की धर्म पत्नी श्वेता बकलीवाल के साथ संस्कृति कार्यक्रम में भाग लेने वाली प्रतिभागियों को पुरुस्कृत किया।

इस दौरान अतिथियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। बच्चों और युवा कलाकारों की प्रतिभा देख अतिथिगण विशेष रूप से प्रभावित हुए।

मुख्य अतिथि कौशल्या देवी साय ने कहाँ यह मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं,बल्कि दुर्ग की आत्मा और परंपरा का जीवंत प्रमाण है। सावन मास में ऐसा आयोजन सभी वर्गों को जोड़ता है और लोकसंस्कृति की रक्षा करता है। मैं आयोजकों को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई देती हूं।

उन्होंने दुर्ग में रिमझिम सावन मेला हर वर्ष एक उम्मीद लेकर आता है। यह एक ऐसा मंच बन गया है, जहाँ मनोरंजन, संस्कृति और सामाजिक एकता का संगम होता है।”

उन्होंने आगे कहा इस मेले ने दुर्ग शहर की पहचान को नए आयाम दिए हैं। नागरिकों की भागीदारी ही इसकी सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस आयोजन को और बड़े स्तर पर करने की आवश्यकता है।”

महापौर अलका बाघमार ने कहा मेले की सफलता में नागरिकों, अधिकारियों और सभी स्टॉल संचालकों का योगदान सराहनीय है। यह मेला अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर बन चुका है। अगले वर्ष और भी बड़े स्तर पर इसका आयोजन किया जाएगा।”

विजेताओं को मिला सम्मान

मेले के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं,जैसे लोकगीत, नृत्य, रंगोली, राखी निर्माण, चित्रकला एवं झूला सजावट के विजेताओं को मुख्य मंच पर प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक मंच पर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को भी प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए।

निगम को मिला जनसमर्थन

मेले की सफलता का श्रेय जहां नगर निगम की कुशल व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा प्रबंध, और प्रचार-प्रसार को जाता है, वहीं शहरवासियों की सहभागिता और अनुशासन भी प्रशंसनीय रहा। मेले में लगे स्टॉल्स, झूले, फूड ज़ोन और शिल्प बाजार ने आम जनता को खूब आकर्षित किया।

उद्योग, समूहों को मंच

मेले में महिला समूहों और स्थानीय कारीगरों को भी अपने उत्पादों के विक्रय और प्रचार का सुनहरा अवसर मिला। पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प, राखी, पौधे,और स्थानीय उत्पादों की खूब बिक्री हुई।

प्रतियोगिताओं में लगभग 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 6 विजेताओं को मंच पर पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।प्रतियोगिता के प्रमुख विजेता के रूप मे प्रथमः अहिल्या बाई होल्कर टीम, द्वितीयः अपरेशान सिंदूर प्रस्तुति, तृतीयः साइबर क्राइम प्रस्तुति रही। वहीं विशेष सम्मानः शिव-पार्वती नृत्य, प्रेरणा राजपूत (डांस), मनीष ग्रुप (मेहंदी) को मिला।

समापन समारोह का संदेश था – “संस्कृति से जुड़ो, परंपरा को जीवित रखो और सामाजिक एकता को मजबूत बनाओ।”नगर निगम द्वारा आगामी वर्षों में इस आयोजन को और विस्तार देने की घोषणा के साथ मेला संपन्न हुआ।

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